Munisuvratnath Jin Chalisa PDF Free Download in 2024

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मुनिसुव्रतनाथ चालीसा जैन धर्म की चालीसाओं में से एक है। आप इस Munisuvratnath Jin Chalisa PDF को डाउनलोड करके इस चालीसा को नियमित रूप से पढ़ सकते हैं।

जैन धर्म के लोग मुनि सुव्रतनाथ को भगवान के रूप में मानते हैं और उनकी चालीसा का भक्तिपूर्वक पाठ करके उन्हें बहुत सम्मान और श्रद्धा देते हैं। उनका मानना है कि इस चालीसा का पाठ करने से उनकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाएंगी और मुनि सुव्रतनाथ उन्हें सभी खतरों से बचाएंगे।

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Munisuvratnath Jin Chalisa PDF Download
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Munisuvratnath Jin Chalisa PDF में कुल 40 भजन या छंद हैं। प्रत्येक श्लोक मुनि सुव्रतनाथ की स्तुति, शक्ति, प्रेम, सम्मान से संबंधित है।

Munisuvratnath Jin Chalisa PDF Details

PDF NameMunisuvratnath Jin Chalisa PDF
PDF CatagoryChalisa
PDF Size139kb
No Of Pages2
LanguageHindi
Sourcepdfkro.com
Last UpdatedFeb,2024
UploadedSoumitra
Munisuvratnath Jin Chalisa PDF Details

Munisuvratnath Chalisa Image

Munisuvratnath Jin Chalisa PDF Download
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Munisuvratnath Jin Chalisa PDF Download का लाभ यह है कि यह आपके डिवाइस पर सेव है ताकि आप जब चाहें इसे पढ़ सकें, लेकिन याद रखें कि इसे हमेशा किसी पवित्र स्थान पर बैठकर भक्ति भाव से पढ़ें।

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Munisuvratnath Chalisa Video

Munisuvratnath Chalisa Video

Shri Munisuvratnath Chalisa Lyrics in Hindi

|| श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा ||

अरिहंत सिद्ध आचार्य को करुं प्रणाम | उपाध्याय सर्वसाधू करते स्वपर कल्याण ||

जिनधर्म, जिनागम, जिनमंदिर पवित्र धाम | वीतराग की प्रतिमा को कोटि-कोटि प्रणाम ||

जय मुनिसुव्रत दया के सागर | नाम प्रभु का लोक उजागर ||

सुमित्रा राजा के तुम नन्दा | मां शामा की आंखो के चन्दा ||

श्यामवर्ण मूरत प्रभू की प्यारी | गुणगान करें निशदिन नर नारी ||

मुनिसुव्रत जिन हो अन्तरयामी | श्रद्धा भाव सहित तुम्हें प्रणामी ||

भक्ति आपकी जो निशदिन करता | पाप ताप भय संकट-हरता ||

प्रभू; संकटमोचन नाम तुम्हारा | दीन दुखी जीवों का सहारा ||

कोई दरिद्री या तन का रोगी | प्रभू दर्शन से होते हैं निरोगी ||

मिथ्या तिमिर भयो अति भारी | भव भव की बाधा हरो हमारी ||

यह संसार महा दुख दाई | सुख नहीं यहां दुख की खाई ||

मोह जाल में फंसा है बंदा | काटो प्रभु भव भव का फंदा ||

रोग शोक भय व्याधि मिटावो | भव सागर से पार लगावो ||

घिरा कर्म से चौरासी भटका | मोह माया बन्धन में अटका ||

संयोग-वियोग भव भव का नाता | राग द्वेष जग में भटकाता ||

हित मित प्रित प्रभू की वाणी | स्वपर कल्याण करें मुनि ध्यानी ||

भव सागर बीच नाव हमारी | प्रभु पार करो यह विरद तिहारी ||

मन विवेक मेरा अब जागा | प्रभु दर्शन से कर्ममल भागा ||

नाम आपका जपे जो भाई | लोका लोक सुख सम्पदा पाई ||

कृपा दृष्टी जब आपकी होवे | धन आरोग्य सुख समृधि पावे ||

प्रभु चरणन में जो जो आवे | श्रद्धा भक्ति फल वांच्छित पावे ||

प्रभु आपका चमत्कार है न्यारा | संकट मोचन प्रभु नाम तुम्हारा ||

सर्वज्ञ अनंत चतुष्टय के धारी | मन वच तन वंदना हमारी ||

सम्मेद शिखर से मोक्ष सिधारे | उद्धार करो मैं शरण तिहांरे ||

महाराष्ट्र का पैठण तीर्थ | सुप्रसिद्ध यह अतिशय क्षेत्र ||

मनोज्ञ मन्दिर बना है भारी | वीतराग की प्रतिमा सुखकारी ||

चतुर्थ कालीन मूर्ति है निराली | मुनिसुव्रत प्रभू की छवि है प्यारी ||

मानस्तंभ उत्तग की शोभा न्यारी | देखत गलत मान कषाय भारी ||

मुनिसुव्रत शनिग्रह अधिष्ठाता | दुख संकट हरे देवे सुख साता ||

शनि अमावस की महिमा भारी | दूर-दूर से आते नर नारी ||

मुनिसुव्रत दर्शन महा हितकारी | मन वच तन वंदना हमारी ||

सोरठा-

सम्यक् श्रद्धा से चालीसा, चालीस दिन पढिये नर- नार |

मुक्ति पथ के राही बन, भक्ति से होवे भव पार ||

FAQ

मुनिसुव्रतनाथ चालीसा का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

मुनिसुव्रतनाथ चालीसा का भक्तिपूर्वक पाठ करने से मन से सभी बुरे विचार दूर हो जाते हैं और मुनि सुव्रतनाथ सभी खतरों से रक्षा करते हैं।


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