मां काली चालीसा PDF 2024 | Ma Kali Chalisa PDF In Hindi (काली चालीसा)

Share this article :

नमस्कार दोस्तों, यदि आप मां काली चालीसा मुफ्त में डाउनलोड करना चाहते हैं, तो आप पीडीएफ को पूरी तरह से मुफ्त डाउनलोड करने के लिए इस पेज पर इस लिंक “मां काली चालीसा PDF” पर क्लिक कर सकते हैं।

इसके अलावा अगर आप मां काली चालीसा (Ma Kali Chalisa) के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो हमारे इस पेज को ध्यान से पढ़ सकते हैं।

यहां हम चर्चा करेंगे – मां काली का जन्म कैसे हुआ, मां काली कौन हैं, मां काली चालीसा के लाभ , काली चालीसा सिद्ध करने की विधि आदि।

चलिए शुरू करते हैं :-

 मां काली चालीसा
मां काली चालीसा

मां काली चालीसा (Ma kali Chalisa) PDF Details

PDF Nameमां काली चालीसा PDF
PDF Size1.29MB
PDF CategoryChalisa Pdf
No Of Pages3
LanguageHindi
Uploaded BySumit
Last UpdateSept,2023
मां काली चालीसा PDF Details

Ma kali Chalisa Lyrics in Hindi | मां काली चालीसा अर्थ सहित

।। दोहा ।।

जय काली जगदम्ब जय, हरनि ओघ अघ पुंज।

वास करहु निज दास के, निशदिन हृदय-निकुंज।।

जयति कपाली कालिका, कंकाली सुख दानि।

कृपा करहु वरदायिनी, निज सेवक अनुमानि।।

हे माँ काली!! आपकी जय हो। हे माँ जगदंबा!! आपकी जय हो। आप ही इस जगत के कष्ट व अहंकार को दूर करती हो। आप अपने भक्तों व सेवक के हृदय में दिन-रात वास करें। हे कपाली कालिका!! आपकी जय हो। आप हम सभी को सुख प्रदान करने वाली हो। आप अपने इस सेवक पर कृपा कीजिये और हमें वरदान दीजिये।

।। चौपाई ।।

जय जय जय काली कंकाली।

जय कपालिनी, जयति कराली।।

शंकर प्रिया, अपर्णा, अम्बा।

जय कपर्दिनी, जय जगदम्बा।।

आर्या, हला, अम्बिका, माया।

कात्यायनी उमा जगजाया।।

गिरिजा गौरी दुर्गा चण्डी।

दाक्षाणायिनी शाम्भवी प्रचंडी।।

हे काली कंकाली माँ!! आपकी जय हो, जय हो, जय हो। हे कपालिनी माँ!! आपकी जय हो। आप अंबा माँ के रूप में शिव भगवान को प्रिय हो। हे कपर्दिनी व जगदंबा माँ!! आपकी जय हो। आर्या, हला, अम्बिका, माया, कात्यायनी, उमा, जगजाया, गिरिजा, गौरी, दुर्गा, चंडी, दाक्षाणायिनी, शाम्भवी, प्रचंडी इत्यादि कई नाम आपके ही हैं।

पार्वती मंगला भवानी।

विश्वकारिणी सती मृडानी।।

सर्वमंगला शैल नन्दिनी।

हेमवती तुम जगत वन्दिनी।।

ब्रह्मचारिणी कालरात्रि जय।

महारात्रि जय मोहरात्रि जय।।

तुम त्रिमूर्ति रोहिणी कालिका।

कूष्माण्डा कार्तिकी चण्डिका।।

पार्वती, मंगला, भवानी, विश्वकारिणी, सती, मृडानी, सर्वमंगला, शैलपुत्री, नंदिनी, हेमवती इत्यादि भी आपके ही नाम हैं। आप इस जगत में वंदनीय हैं। आपके ब्रह्मचारिणी, कालरात्रि, महारात्रि व मोहरात्रि रूप की जय हो। आप ही त्रिमूर्ति, रोहिणी, कालिका, कूष्मांडा, कार्तिकी व चंडिका हो।

तारा भुवनेश्वरी अनन्या।

तुम्हीं छिन्नमस्ता शुचिधन्या।।

धूमावती षोडशी माता।

बगला मातंगी विख्याता।।

तुम भैरवी मातु तुम कमला।

रक्तदन्तिका कीरति अमला।।

शाकम्भरी कौशिकी भीमा।

महातमा अग जग की सीमा।।

आप ही माँ तारा, भुवनेश्वरी, अनन्या, छिन्नमस्ता, शुचिधन्या, धूमावती, षोडशी, बगलामुखी, मातंगी के रूप में प्रसिद्ध हो। तुम ही भैरवी, कमला व रक्तदंतिका के रूप में प्रसिद्ध हो। तुम ही शाकम्भरी, कौशिकी, भीमा, महातमा के रूप में इस जगत की सीमा हो।

चन्द्रघण्टिका तुम सावित्री।

ब्रह्मवादिनी माँ गायत्री।।

रूद्राणी तुम कृष्ण पिंगला।

अग्निज्वाल तुम सर्वमंगला।।

मेघस्वना तपस्विनि योगिनी।

सहस्त्राक्षि तुम अगजग भोगिनी।।

जलोदरी सरस्वती डाकिनी।

त्रिदशेश्वरी अजेय लाकिनी।।

तुम ही चन्द्रघंटिका, सावित्री, ब्रह्मवादिनी, गायत्री, रुद्राणी, कृष्ण पिंगला, अग्नि की ज्वाला, सभी का मंगल करने वाली, मेघ की गर्जना, तपस्विनी, योगिनी, सहस्त्राक्षि, भोगिनी, जल में निवास करने वाली, सरस्वती, डाकिनी, त्रिदशेश्वरी, ना जीती जा सकने वाली व लाकिनी हो।

पुष्टितुष्टि धृति स्मृति शिव दूती।

कामाक्षी लज्जा आहूती।।

महोदरी कामाक्षि हारिणी।

विनायकी श्रुति महा शाकिनी।।

अजा कर्ममोही ब्रह्माणी।

धात्री वाराही शर्वाणी।।

स्कन्द मातु तुम सिंह वाहिनी।

मातु सुभद्रा रहहु दाहिनी।।

आपके द्वारा ही भगवान शिव को स्मृति होती है और आप ही कामाक्षी रूप में लज्जा की आहुति दे देती हो। आप ही महोदरी रूप में कामाक्षी का नाश करती हो तो वहीं गणेश भगवान आपके महाशाकिनी रूप का ध्यान करते हैं। भगवान ब्रह्मा आपके ब्रह्माणी रूप का ध्यान करते हैं तो वहीं विष्णु शर्वाणी रूप में मग्न रहते हैं। आप ही स्कंदमाता के रूप में सिंह की सवारी करती हैं। आप ही माँ सुभद्रा के रूप में कष्टों का नाश करती हैं।

नाम रूप गुण अमित तुम्हारे।

शेष शारदा बरणत हारे।।

तनु छवि श्यामवर्ण तव माता।

नाम कालिका जग विख्याता।।

अष्टादश तब भुजा मनोहर।

तिनमहँ अस्त्र विराजत सुंदर।।

शंख चक्र अरु गदा सुहावन।

परिघ भुशुण्डी घण्टा पावन।।

आपके गुणों के अनुसार अनेक नाम हैं जिनका वर्णन करते हुए तो शेषनाग व शारदा भी हार जाते हैं। आपके शरीर का रंग श्याम अर्थात काला है और आपका काली नाम पूरे जगत में प्रसिद्ध है। आपकी आठ भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र बहुत ही सुन्दर लग रहे हैं। आपने अपने हाथों में शंख, चक्र, गदा इत्यादि ले रखे हैं जिससे आप राक्षसों का वध करती हैं और भक्तों को सुख देती हैं।

शूल बज्र धनुबाण उठाए।

निशिचर कुल सब मारि गिराए।।

शुंभ निशुंभ दैत्य संहारे।

रक्तबीज के प्राण निकारे।।

चौंसठ योगिनी नाचत संगा।

मद्यपान कीन्हेउ रण गंगा।।

कटि किंकिणी मधुर नूपुर धुनि।

दैत्यवंश कांपत जेहि सुनि-सुनि।।

आपने शूल, बज्र व धनुष-बाण उठाया हुआ है और उससे आपने राक्षसों का कुल सहित नाश कर दिया है। आपने ही शुंभ-निशुंभ व रक्तबीज जैसे भयानक राक्षसों का वध किया था। आपके साथ चौंसठ योगियां नाच रही हैं और आपने युद्धभूमि में मदिरा पान किया था। आपकी आवाज मात्र से ही दैत्य वंश में हाहाकार मच जाता है और वे कांपने लग जाते हैं।

कर खप्पर त्रिशूल भयकारी।

अहै सदा सन्तन सुखकारी।।

शव आरूढ़ नृत्य तुम साजा।

बजत मृदंग भेरी के बाजा।।

रक्त पान अरिदल को कीन्हा।

प्राण तजेउ जो तुम्हिं न चीन्हा।।

लपलपाति जिव्हा तब माता।

भक्तन सुख दुष्टन दुःख दाता।।

आपने अपने हाथों में खप्पर व त्रिशूल भी पकड़ा हुआ है जिससे शत्रु भयभीत रहते हैं। आप हमेशा अपने भक्तों को सुख प्रदान करती हैं। आप राक्षसों के शवों पर नृत्य करती हैं और मृदंग की ताल पर नाचती हैं। आप तो युद्धभूमि में शत्रुओं का रक्त तक पी जाती हैं। आपकी जीभ उनका रक्त पीने के लिए लपलपाती है और आप अपने भक्तों के सभी दुःख व संकट दूर कर देती हैं।

लसत भाल सेंदुर को टीको।

बिखरे केश रूप अति नीको।।

मुंडमाल गल अतिशय सोहत।

भुजामल किंकण मनमोहत।।

प्रलय नृत्य तुम करहु भवानी।

जगदम्बा कहि वेद बखानी।।

तुम मशान वासिनी कराला।

भजत तुरत काटहु भवजाला।।

आपने भाला पकड़ा हुआ है, सिन्दूर का तिलक किया हुआ है और बाल बिखरे हुए हैं। आपके गले में राक्षसों के कटे सिर की माला है और आठों भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र हैं। आपकी यह छवि बहुत ही सुन्दर लग रही है। आप प्रलय काल में भवानी रूप में नृत्य करती हैं और आपकी महिमा का बखान तो वेद भी करते हैं। आप अग्नि में वास करती हैं और आपके भजन करने से हमारे सभी बंधन टूट जाते हैं।

बावन शक्ति पीठ तव सुन्दर।

जहाँ बिराजत विविध रूप धर।।

विन्धवासिनी कहूँ बड़ाई।

कहूँ कालिका रूप सुहाई।।

शाकम्भरी बनी कहूँ ज्वाला।

महिषासुर मर्दिनी कराला।।

कामाख्या तव नाम मनोहर।

पुजवहिं मनोकामना द्रुततर।।

आपके बावन शक्तिपीठ बहुत ही सुन्दर लग रहे हैं जिनमें आपने अलग-अलग रूप लिए हुए हैं। कहीं आप विंध्यवासिनी रूप में प्रचलित हैं तो कहीं आपका कालिका नाम प्रसिद्ध है। कहीं आप शाकम्भरी तो कहीं ज्वाला माता तो कहीं महिषासुर मर्दिनी के रूप में विख्यात हैं। आपका कामख्या नाम मन को मोहित कर देने वाला है और जो भी आपकी पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।

चंड मुंड वध छिन महं करेउ।

देवन के उर आनन्द भरेउ।।

सर्व व्यापिनी तुम माँ तारा।

अरिदल दलन लेहु अवतारा।।

खलबल मचत सुनत हुँकारी।

अगजग व्यापक देह तुम्हारी।।

तुम विराट रूपा गुणखानी।

विश्व स्वरूपा तुम महारानी।।

आपने ही चंड-मुंड नामक राक्षसों का वध कर देवताओं को अभय वरदान दिया था। माँ तारा के रूप में आप हर जगह व्याप्त हैं और दुष्टों की सेना में आप हाहाकार मचा देती हैं। आपकी हुँकार सुनते ही दुष्टों की सेना में प्रलय मच जाती है और आपका रूप हर जगह व्याप्त है। आपका रूप बहुत ही विशाल है और आप सब जगह वंदनीय हैं।

उत्पत्ति स्थिति लय तुम्हरे कारण।

करहू दास के दोष निवारण।।

माँ उर वास करहू तुम अंबा।

सदा दीन जन की अवलंबा।।

तुम्हारो ध्यान धरै जो कोई।

ता कहँ भीति कतहुँ नहिं होई।।

विश्वरूप तुम आदि भवानी।

महिमा वेद पुराण बखानी।।

हम सभी की उत्पत्ति का कारण आप ही हैं और आप ही हमारे दोष को दूर कर सकती हैं। आप इस सेवक के हृदय में वास कीजिये और इस दीन की रक्षा कीजिये। आपका ध्यान जो कोई भी व्यक्ति करता है, उसे किसी भी प्रकार का संकट नहीं होता है। आप आदि काल से हैं और संपूर्ण विश्व में विख्यात हैं। आपकी महिमा का वर्णन तो वेद भी करते हैं।

अति अपार तव नाम प्रभावा।

जपत न रहन रंच दुःख दावा।।

महाकालिका जय कल्याणी।

जयति सदा सेवक सुखदानी।।

तुम अनन्त औदार्य विभूषण

कीजिये कृपा क्षमिये सब दूषण।।

दास जानि निज दया दिखावहु।

सुत अनुमानित सहित अपनावहु।।

आपके नाम की बहुत महिमा है और जो भी आपका नाम जपता है, उसके सभी दुःख दूर हो जाते हैं। महाकालिका के रूप में आप हम सभी का कल्याण करती हैं और अपने भक्तों को सुख प्रदान करती हैं। आप अनन्त, औदार्य से विभूषित हैं और अब आप हमारे दोष दूर कर हमें क्षमा कीजिये। आप हमें अपना सेवक मान कर हम पर थोड़ी दया दिखाइए और हमें अपना लीजिये।

जननी तुम सेवक प्रति पाली।

करहु कृपा सब विधि माँ काली।।

पाठ करै चालीसा जोई।

तापर कृपा तुम्हारी होई।।

आप हमेशा से ही अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और हम सभी विधिपूर्वक आपकी पूजा करते हैं। जो भी इस काली माँ की चालीसा का पाठ करता है, उस पर माँ की कृपा दृष्टि रहती है।

।। दोहा ।।

जय तारा जय दक्षिणा, कलावती सुखमूल।

शरणागत भक्त है, रहहु सदा अनुकूल।।

माँ तारा की जय हो, माँ दक्षिणा की जय हो। कलावती के रूप में आप सुखों को प्रदान करने वाली हो। आपकी शरण में हम सभी भक्तगण आये हैं और अब आप हमारा उद्धार कीजिये।

माँ काली का जन्म | मां काली चालीसा (Ma Kali Chalisa) 2024

कौन हैं मां काली?

जो अतीत को दबा देता है. इसीलिए इसका नाम काल विजयिनी है

काल क्या है?

ब्रह्मांड समयको काल बोला जाता है, यह इतना बड़ा और इतना विशाल है कि इसके भीतर अच्छाई, बुराई, पाप, पूर्णता, जन्म, मृत्यु है। कल को कोई नहीं हरा सकता. केबल मां काली काल को हरा सकती है। इसलिए काली नाम ‘काल’ से आया है।

माँ काली की आकृति विज्ञान (Ma Kali)

पुराणों में कहा गया है कि मां काली का रूप इसलिए काला है क्योंकि देवताओं से असुरों के अत्याचारों के बारे में सुनकर जब मां बहुत क्रोधित हो गईं तो क्रोध से मां का शरीर काला पड़ गया। इसी कारण मां काली का रंग काला है।

फिर टैगोर रामकृष्ण देव ने कहा कि पानी का कोई रंग नहीं होता और दूर से भले ही अंतरिक्ष का रंग नीला दिखाई दे, आप जितना ऊपर जाएंगे, अंतरिक्ष का कोई रंग नहीं होगा। वास्तव में, यदि आप देवी काली को दूर से देखते हैं, तो यह “काली” है, लेकिन यदि आप देवी मां के करीब जाते हैं, तो यह चमकीली है।

काली चालीसा का महत्व | Shree Kali Chalisa ka mahatva

समय हमेशा बदलता रहता है. कल का मतलब अंत है. फिर, माँ काली का अर्थ है घोर कृष्ण, अत्यंत भयानक, विकराल रूप, विनाश का प्रतीक। इसलिए माँ काली से सभी प्रेम करते हुए भी डरते हैं। लेकिन मां ऐसी नहीं होती कि मां हमेशा सबकी रक्षा करती हो।

एक माँ हमेशा अपने बच्चे को आशीर्वाद देती है। अगर आप भक्ति भाव से मां काली का आह्वान कर सकते हैं तो मां काली आपको हमेशा बांहें फैलाकर आशीर्वाद देंगी।

दुर्गा पूजा के बाद अमावस्या तिथि को काली पूजा होती है। और ऐसा शुरू से होता आ रहा है. और माँ के चरणों के नीचे सहहित देवादिदेव महादेव। और वह एक हाथ से जीभ बाहर निकाले हुए खड़े हैं।

महादेव का दूसरा नाम काल है इसलिए महादेव की पत्नी के रूप में देवी पार्वती के इस रूप को काली कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब असुर देवताओं के स्वर्ग को हड़पने के लिए उत्पात मचाते हैं। तभी सभी देवताओं ने देवी दुर्गा की रचना की। और उन असुरों का मुखिया रक्तवीज था जो ब्रह्मा का वरदान प्राप्त था।

Also Read : मां दुर्गा चालीसा | Durga Chalisa Pdf Download In Hindi

तभी उनके शरीर से एक फोटो के रक्त से हजारों राक्षस पैदा हो गए। उस स्थिति से निपटने के लिए, देवी दुर्गा ने अपने जुड़वां भाइयों के बीच से माँ काली को जन्म दिया। और वह एक-एक करके सभी राक्षसों का नाश करने लगे।

 मां काली चालीसा
मां काली चालीसा

यदि असुर रक्त की एक बूंद भी बहा दें तो काली उसे अपनी जीभ से निगल लेते थे। इस प्रकार सभी असुरों को नष्ट करने के बाद, अंततः असुरों के राजा ने रक्तबीज को नष्ट कर दिया और उसका सारा खून पी लिया, इस प्रकार उसने सभी असुरों को मार डाला।

सभी असुरों को मारने के बाद, उन्होंने उनके सिर पर घेरा बनाकर नृत्य करना शुरू कर दिया और एक-एक करके सब कुछ नष्ट कर दिया। ऐसे में महादेव उस नित्यता को रोकने के लिए काली के नीचे जाकर लेट गए।

फिर उसने अपने पति को अपने पैरों के पास लेटे हुए देखकर अपनी जीभ काट ली। इस प्रकार माँ काली अपनी शांत अवस्था में लौट आती हैं।

मां काली मंत्र | Mahakali Mantra Lyrics

॥ काली काली महाकाली दोनों हाथ बजावै ताली “अमुक” शत्रु को बांधे घर में लड़े मरे कटे महाकाली फट् ॥ ॥ Kali Kali Mahakali Dono Haath Bajave Tali, ‘Amuk’ Shatru Ko Bandhe Ghar Me Lade Mare Kate Mahakali Phat ॥

मां काली चालीसा (Ma Kali Chalisa) MP3 & Video

मां काली चालीसा MP3 & Video

काली चालीसा के लाभ | Ma Kali Chalisa Benefits in Hindi

दोस्तों, आइए अब जानते हैं कि मां काली चालीसा (Ma Kali Chalisa) का पाठ करने से मनुष्य के जीवन में क्या-क्या फायदे होते हैं। मां काली चालीसा (Ma Kali Chalisa) का नियमित पाठ करने से जीवन में कई लाभ मिलते हैं। शास्त्रों में और विशेषकर तांत्याशास्त्र में इसका महत्व है।

  • माँ काली की पूजा करने से जन्महीन अवस्था, भक्ति या मुखिया प्राप्त करने में मदद मिलती है। वह समय और गति को नियंत्रित करती हैं। वह अपने भक्तों को उनकी आध्यात्मिक गतिविधियों में मदद करती हैं। केवल माता का एक गहरा अनुयायी ही उनका अर्थ समझ सकता है।
  • वह अपने उपासकों और भक्तों को शत्रुओं और विरोधियों से सुरक्षा प्रदान करती है। देवी माँ की शक्ति आपको बुरी आत्माओं से बचा सकती है।
  • जो लोग नियमित रूप से मां काली चालीसा (Kali Chalisa) का पाठ करते हैं उन्हें अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। क्योंकि देवी काली शक्ति की देवी हैं। वह अपनी संतान को कभी भी शक्तिहीन नहीं होने देती हैं।
  • जब आपको लगे कि आपके साथ अन्याय हुआ है या आपको धोखा दिया गया है तो माँ के सामने समर्पण कर दें। क्योंकि वह अपने बच्चों की पुकार पर निरुत्तर नहीं रह सकता।
  • मां काली चालीसा (Ma Kali Chalisa) का नियमित पाठ आपको नवग्रह के हानिकारक प्रभावों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। राहुल दोष से मुक्ति के लिए राहु काल में मां काली चालीसा का पाठ करना आदर्श माना जाता है।
  • इसके अलावा शनिदेव के प्रकोप से छुटकारा पाने के लिए नियमित रूप से मां काली चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

Also Read: – शनि देव चालीसा ( Shani Dev Chalisa) PDF हिंदी में

मां काली चालीसा सिद्ध करने की विधि

मां तारा मंत्र : यह मंत्र केवल किसी सिद्ध या गुरु द्वारा ही दिया जा सकता है। और इस मंत्र का जाप करने से पहले किसी जानकार से सलाह ले लें

 मां काली चालीसा
मां काली चालीसा (Ma Kali Chalisa)

वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए साधक द्वारा “मां तारा” मंत्र का जाप किया जाता है। “तारा मंत्र” का अभ्यास करने से सभी सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। “मां तारा” के इस मंत्र का जाप करने से कर्म शांति अर्थात मोक्ष की प्राप्ति होती है। “माँ तारा” दशमहाविद्या की एक शक्ति हैं।

लेकिन इस मंत्र का जाप करने के कुछ नियम हैं जैसे :

  • सबसे पहले जब आप इस मंत्र का जाप शुरू करें तो सबसे पहले सात बार ॐ जोड़ें।
  • इस मंत्र का जाप करने से पहले आपको अपने गुरुदेव से अनुमति लेनी चाहिए।
  • जप करते समय शुद्ध वस्त्र और रुद्राक्ष की माला से जप करें
  • जप करते समय भक्तिभाव से परिपूर्ण अत्यंत स्थिर मन से जप करें
  • जाप के बाद आप मां काली से मंत्र में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा मांगेंगे

मां काली चालीसा PDFDOWNLOAD

FAQ:

मां काली का मंत्र क्या है?

॥ काली काली महाकाली दोनों हाथ बजावै ताली “अमुक” शत्रु को बांधे घर में लड़े मरे कटे महाकाली फट् ॥

काली और महाकाली में क्या अंतर है?

जो काली है वही महाकाली है। माँ काली और महाकाली में कोई अंतर नहीं है। माँ काली के भयानक रूप को महाकाली कहा जाता है।

काली और भद्रकाली में क्या अंतर है?

महाकाली और भद्र काली के बीच कोई अंतर नहीं है. मां काली के भयानक रूप को महाकाली कहा जाता है और सुख-समृद्धि देने वाले दूसरे रूप को भद्रकाली कहा जाता है।

माँ काली का अवतार कौन है?

मां काली देवी पार्वती का ही एक रूप हैं। जब देवता असुरों के अत्याचारों से तंग आ गए तो देवी मां क्रोधित हो गईं और काली पड़ गईं और मां काली का रूप धारण कर लिया।

माँ काली के गुरु कौन हैं?

माँ काली के गुरु गोरखनाथ

Conclusion:

याद रखने वाली बात यह है कि केवल मां काली की पूजा करने से देवी मां संतुष्ट नहीं होती हैं। यदि आप उन्हें प्रसन्न करना चाहते हैं तो आपको समाज में अच्छे कार्य करने होंगे। इसलिए अपने बुरे समय से छुटकारा पाने और इसके गुप्त गुणों को जानने के लिए (मां काली चालीसा) पढ़ें

और अपने दैनिक जीवन में कई अच्छे कार्य करें जिससे समाज में पांच और लोगों का भला हो सके। अन्य चालीसा पीडीएफ डाउनलोड के लिए हमारी वेबसाइट “PDFKro.com” पर जाएं। आपको हमारा लेख कैसा लगा, नीचे कमेंट करें और यदि आपके पास कोई प्रतिक्रिया या सुझाव है तो हमें बताएं।

Another Chalisa PDF :-

शिव चालीसा हिन्दी में PDF-Shiv Ji Chalisa PDF Hindi Download

विंध्याचल चालीसा | Free Vindhyachal Chalisa PDF Download In Hindi 2023

Free Download Full Hanuman Chalisa PDF In Hindi 2023 – हनुमान चालीसा

मां लक्ष्मी चालीसा – Free Laxmi Chalisa PDF Hindi 2023

Hanuman Chalisa Pdf Tamil Free Download 2023 – ஹனுமான் சாலீஸா


Share this article :

Leave a Comment